दुःख के वेश में आया है…सुख!

अपनी ही उलझनों में फिरें भरमाया.. दुःख के वेश में आया हैं सुख! मेरे मन तूं पहचान ना पाया…” ‘होनी हो कर रहती हैं कोई शक्ति इसे बदल नहीं सकती’ सुना हैं न ये ? पर किसको कहते हैं ‘होनी’……

अपनी ही उलझनों में फिरें भरमाया.. दुःख के वेश में आया हैं सुख! मेरे मन तूं पहचान ना पाया…” ‘होनी हो कर रहती हैं कोई शक्ति इसे बदल नहीं सकती’ सुना हैं न ये ? पर किसको कहते हैं ‘होनी’……